सुनील गावस्कर के बेटे रोहन का प्रस्ताव: BCCI की तरह राज्य अपने खिलाड़ियों के लिए करे वार्षिक कॉन्ट्रैक्ट

भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर और सुनील गावस्कर के बेटे रोहन गावस्कर ने घरेलू क्रिकेटरों के लिए राज्य क्रिकेट संघों से एक मांग की है। रोहन गावस्कर ने राज्य क्रिकेट संघों से मांग की है कि जिस तरह से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई राष्ट्रीय टीम के लिए करती है उसी तरह से घरेलू क्रिकेटरों के लिए भी वार्षिक अनुबंध की शुरुआत होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि बीसीसीआई के वार्षिक अनुबंध की राशि बहुत ज्यादा होती है लेकिन लेकिन राज्य संघ घरेलू क्रिकेटरों के लिए राशि अपने हिसाब से तय कर सकते हैंं।

गावस्कर ने किया ट्वीट
रोहन गावस्कर ने ट्वीट करते हुए लिखा कि सभी राज्य संघों को वार्षिक अनुबंध बनाना चाहिए जैसा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) टीम इंडिया के लिए करती है। साथ ही उन्होंने लिखा कि अगर राज्य संघों के अनुबंध नहीं रहेंगे तो घरेलू खिलाड़ियों को भुगतान मिलना असंभव हो जाएगा। गौरतलब है कि बीसीसीआई अपने वार्षिक अनुबंध के तहत टीम इंडिया के पुरुष खिलाड़ियों को 4 वर्गों में बांटती है और उसी के अनुसार उन्हें भुगतान किया जाता है। इसमें ए प्लस कैटेगरी वाले खिलाड़ियों को एक साल के लिए सबसे ज्यादा रकम मिलती है।

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क्या युवा खिलाड़ियों को कुछ नहीं मिलेगा?
साथ ही रोहन गावस्कर ने कहा,'क्या किसी सीनियर खिलाड़ी को बीच में ड्रॉप किया जा सकता है। उन युवा खिलाड़ियों का क्या जो डेब्यू कर सकते हैं। क्या उन्हें कुछ नहीं मिलेगा?' साथ ही रोहन का कहना है कि राज्य संघों को अपने खिलाड़ियों को देखने की जरूरत है। घरेलू खिलाड़ी वो हैं जो खेल को आगे बढ़ाते हैं। उनका ख्याल रखना चाहिए और उनके लिए वार्षिक अनुबंध की शुरुआत करनी चाहिए।

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भुगतान में हो रहा विलंब
फिलहाल घरेलू खिलाड़ियों को बीसीसीआई से अपने मुआवजे का इंतजार है क्योंकि राज्य संघों ने अब तक जरूरी जानकारी नहीं भेजी है। कोरोना महामारी के कारण बीसीसीआई मुख्यालय बंद है और इसी वजह से से वेतन और मुआवजे के भुगतान में देरी हो रही है। वहीं ज्यादातर घरेलू खिलाड़ियों को पिछले कुछ सत्र में बीसीसीआई के राजस्व में भी हिस्सा नहीं मिला है। बीसीसीआई हमेशा टीवी प्रसारण से मिलने वाले राजस्व का हिस्सा घरेलू क्रिकेटरों को देता है और ऐसा आम तौर पर सितंबर में वार्षिक खाते तैयार करने के बाद होता है।



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