टीम इंडिया के पूर्व ट्रेनर ने कहा- खेलने का मौका न मिले तो फिटनेस पर काम करना समय की बर्बादी है

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ट्रेनर रामजी श्रीनिवासन का मानना है कि अगर खिलाड़ी नहीं खेलते हैं तो उनकी फिटनेस का मतलब नहीं रह जाता है। बिना खेल के फिटनेस पर काम करना समय की बर्बादी है। 2011 वर्ल्ड कप के दौरान वे टीम इंडिया के स्ट्रेंथ और कंडिशनिंग कोच थे।
रामजी ने कहा- फिटनेस के बाद अगर आप मैदान पर इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं तो यह बेकार है। एक का दूसरे में सकारात्मक ट्रांसफर ही फिटनेस का आधार है। क्या गेंदबाजों के लिए लॉन्ग ब्रेक मुश्किल हो सकता है। इस पर उन्होंने कहा- गेंदबाजी लय और कौशल आधारित फिटनेस से जुड़ी है। दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं। ऐसे में कौशल आधारित फिटनेस निश्चित तौर पर प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि यह खिलाड़ियों के लिए कठिन समय है, क्योंकि उन्हें टूर्नामेंट शुरू होने से पहले मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर काम करना है।
बतौर विकेटकीपर धोनी की जगह लेने का दबाव रहता है
इधर, लोकेश राहुल ने कहा कि विकेट के पीछे महेंद्र सिंह धोनी की जगह लेने का बहुत दबाव रहता है। पिछले कुछ समय से राहुल बतौर विकेटकीपर खेल रहे हैं। उन्होंने कहा- जब मैं विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी निभा रहा था तो नर्वस था, क्योंकि दर्शकों के कारण आप पर दबाव रहता है। अगर आप चूक जाते हैं तो लोग सोचते हैं कि आप धोनी की जगह नहीं ले सकते। विकेटकीपर के रूप में किसी को स्वीकार करने पर लोगों के दिमाग में यह बात जरूर आती है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
टीम इंडिया के पूर्व ट्रेनर रामजी श्रीनिवासन के मुताबिक, लंबे ब्रेक की वजह से गेंदबाजों को परेशानी हो सकती है। क्योंकि गेंदबाजी लय और कौशल आधारित फिटनेस से जुड़ी है। (फाइल)


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3eYwqXi

Comments

Popular posts from this blog

CWC2019: वर्ल्ड कप जीतना है तो आईपीएल की 'खुमारी' से बाहर आ जाओ टीम इंडिया

Asia Cup 2025: Are Suryakumar Yadav's India 'undercooked' for the continental tournament?

Shastri reveals truth behind Jadeja’s CSK exit: 'He always knew ...'